देखें कि धीमे ग्रह — शनि, गुरु, राहु और केतु — 2026 में किन राशियों से गुजरते हैं, कब राशि बदलते हैं, और प्रत्येक गोचर आपकी राशि को कैसे प्रभावित करता है।
निरयन, लाहिरी (चित्रपक्ष) अयनांश से — भारत सरकार का मानक। पश्चिमी सायन पंचांग से इनमें लगभग 24° का अंतर मिलेगा।
ग्रह के वक्री होने का वास्तव में क्या अर्थ है?
यह कि पृथ्वी से देखने पर ग्रह तारों की पृष्ठभूमि में पीछे की ओर चलता दिखता है। शास्त्रीय दृष्टि से यह ग्रह के कारकत्व को उलटता नहीं, बल्कि उसे गहरा और भीतर की ओर मोड़ देता है, और अपने आप में यह कोई दुर्भाग्य नहीं है।