वाराणसी में आज का राहु काल

वाराणसी में आज का राहु काल, स्थानीय समय में सटीक प्रारंभ और समाप्ति के साथ। राहु काल दैनिक अशुभ अवधि है — महत्वपूर्ण कार्य या यात्रा शुरू करने से बचें।

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वाराणसी में राहु काल कैसे निर्धारित होता है

राहु काल दिन का आठवाँ भाग है — सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटकर — और इनमें से कौन सा भाग राहु काल होगा, यह केवल वार पर निर्भर करता है। चूँकि यह विभाजन वाराणसी के अपने सूर्योदय से आरंभ होता है, इसलिए यहाँ इसका प्रारंभ समय और अवधि दोनों वर्ष भर बदलते रहते हैं, किसी निश्चित घड़ी-समय पर स्थिर नहीं रहते।

वाराणसी की घड़ी बनाम सूर्य

पूरे भारत में एक ही घड़ी (IST) चलती है, जो 82.5°E देशांतर पर नियत है, जबकि देश लगभग 28° देशांतर में फैला है। वाराणसी 82.97°E पर स्थित है, इसलिए यहाँ सूर्य अपने उच्चतम बिंदु पर घड़ी के हिसाब से लगभग 2 मिनट पहले पहुँचता है। इससे वाराणसी में सौर मध्याह्न नई दिल्ली की तुलना में लगभग 23 मिनट पहले पड़ता है; सूर्योदय भी इसी के साथ खिसकता है, यद्यपि अक्षांश के कारण ऋतु के अनुसार वह कुछ और आगे-पीछे होता है। राहु काल, चौघड़िया और सभी मुहूर्त स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त से बनते हैं — इसलिए दिल्ली के पंचांग से नकली गई तालिका वाराणसी के लिए लगभग इतने ही मिनट गलत होगी।

वर्ष भर अवधि क्यों बदलती है

वाराणसी 25.32°N अक्षांश पर है। यहाँ सबसे लंबे दिन में लगभग 13 घंटे 35 मिनट और सबसे छोटे दिन में लगभग 10 घंटे 25 मिनट का उजाला रहता है — वर्ष भर में लगभग 3 घंटे 9 मिनट का अंतर। चूँकि दिन के आठ चौघड़िया काल सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटकर बनते हैं, इसलिए वाराणसी में गर्मियों का प्रत्येक चौघड़िया सर्दियों की तुलना में स्पष्ट रूप से लंबा होता है। यही बात राहु काल पर भी लागू होती है, जो दिन का आठवाँ भाग है।

गणना पद्धति

गणना 25.32°N, 82.97°E (Asia/Kolkata) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस से की जाती है — पहले उस दिन का सटीक सूर्योदय और सूर्यास्त, फिर उसी से राहु काल, चौघड़िया और पंचांग के अंग। कोई निकटतम बड़े शहर का अनुमान नहीं।

क्या वाराणसी के लिए दिल्ली का पंचांग इस्तेमाल किया जा सकता है?

सटीकता चाहिए तो नहीं। वाराणसी का सौर दिन नई दिल्ली से लगभग 23 मिनट पहले चलता है, और राहु काल व चौघड़िया की सभी सीमाएँ उसी के साथ खिसक जाती हैं। छोटे कार्यों के लिए अंतर मामूली है, पर मुहूर्त के लिए यह पर्याप्त बड़ा है।

वाराणसी में राहु काल का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

क्योंकि यह घड़ी का निश्चित समय नहीं, बल्कि सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन का आठवाँ भाग है। वाराणसी में दिन की लंबाई वर्ष भर लगभग 3 घंटे 9 मिनट तक बदलती है, इसलिए राहु काल का प्रारंभ और अवधि दोनों उसी के साथ बदलते हैं।

क्या ये समय मेरी कुंडली पर निर्भर करते हैं?

नहीं। राहु काल, चौघड़िया और पंचांग स्थान और तिथि पर आधारित हैं — वाराणसी में उस दिन सबके लिए एक ही। आपकी जन्म कुंडली से जुड़ा व्यक्तिगत मुहूर्त अलग विषय है, और उसके लिए आपका जन्म विवरण चाहिए।