शुक्र भोग-विलास के आचार्य हैं — प्रेम, सौंदर्य और परिष्कार। ये प्रणय, विवाह और (पुरुष-कुंडली में) पत्नी, कला-संगीत, विलास, सुख-वाहन और प्रजनन-तंत्र के कारक हैं। सबसे लंबी (20 वर्ष) दशा के स्वामी — संबंध और जीवन के सुखों के अधिपति।
शुक्र भोग-विलास के आचार्य हैं — प्रेम, सौंदर्य और परिष्कार। ये प्रणय, विवाह और (पुरुष-कुंडली में) पत्नी, कला-संगीत, विलास, सुख-वाहन और प्रजनन-तंत्र के कारक हैं। सबसे लंबी (20 वर्ष) दशा के स्वामी — संबंध और जीवन के सुखों के अधिपति।
बलवान शुक्र (मीन में उच्च, स्वराशि वृषभ/तुला) आकर्षण, कला-प्रतिभा, सुखद वैवाहिक जीवन, सौंदर्य, धन-वाहन-सुख और स्नेही, मधुर स्वभाव देता है।
निर्बल शुक्र (कन्या में नीच, अस्त, पीड़ित) संबंधों में कटुता, सुख-स्नेह की कमी, अति-भोग तथा प्रजनन-तंत्र या वृक्क विकार दे सकता है।
कला-संगीत व मनोरंजन, फैशन-सौंदर्य, विलास व आतिथ्य, डिज़ाइन, कूटनीति, वाहन-क्षेत्र — सौंदर्य, सुख और संबंधों का हर क्षेत्र।
शुक्रवार को शुक्र बीज मंत्र जपें, चावल-चीनी-दही-श्वेत वस्त्र का दान करें, लक्ष्मी-पूजन करें, स्त्रियों व जीवनसाथी का सम्मान करें और कला-सौंदर्य को साधें।
शुक्र भोग-विलास के आचार्य हैं — प्रेम, सौंदर्य और परिष्कार। ये प्रणय, विवाह और (पुरुष-कुंडली में) पत्नी, कला-संगीत, विलास, सुख-वाहन और प्रजनन-तंत्र के कारक हैं। सबसे लंबी (20 वर्ष) दशा के स्वामी — संबंध और जीवन के सुखों के अधिपति।
शुक्र वृषभ, तुला का स्वामी है। यह मीन 27° में उच्च और कन्या 27° में नीच होता है; मूलत्रिकोण तुला 0°–15° है।
विंशोत्तरी दशा के 120 वर्षों में शुक्र की महादशा 20 वर्ष की होती है।
शुक्र का रत्न Diamond (Heera) है। शुक्रवार को शुक्र बीज मंत्र जपें, चावल-चीनी-दही-श्वेत वस्त्र का दान करें, लक्ष्मी-पूजन करें, स्त्रियों व जीवनसाथी का सम्मान करें और कला-सौंदर्य को साधें।