वैदिक ज्योतिष में राहु (Rahu (North Node))

राहु — उत्तर चंद्र-नोड — अतृप्त कामना की छाया है: महत्वाकांक्षा, मोह (माया) और जुनून। ये विदेश, तकनीक, आकस्मिक उत्थान, अपरंपरागत-वर्जित क्षेत्र, जन-प्रसिद्धि और व्यसन के कारक हैं। छाया-ग्रह होने से जिसे छूते हैं, उसे कई गुना कर देते हैं।

कारकत्व (फल)

राहु — उत्तर चंद्र-नोड — अतृप्त कामना की छाया है: महत्वाकांक्षा, मोह (माया) और जुनून। ये विदेश, तकनीक, आकस्मिक उत्थान, अपरंपरागत-वर्जित क्षेत्र, जन-प्रसिद्धि और व्यसन के कारक हैं। छाया-ग्रह होने से जिसे छूते हैं, उसे कई गुना कर देते हैं।

जब बलवान हो

अनुकूल राहु (वृषभ में उच्च, शुभ-युक्त, उपचय भाव 3/6/10/11 में) सांसारिक सफलता, विदेश-लाभ, प्रसिद्धि, तकनीक या अनूठे क्षेत्रों में महारत और नई ज़मीन तोड़ने का साहस दे सकता है।

जब कमज़ोर या पीड़ित हो

पीड़ित राहु भ्रम, चिंता, छल, अपयश, व्यसन, आकस्मिक उथल-पुथल और कभी न भरने वाला असंतोष दे सकता है; केतु के साथ यह काल सर्प योग बनाता है।

करियर और क्षेत्र

तकनीक व सॉफ्टवेयर, विमानन व विदेश-व्यापार, शोध, मीडिया-राजनीति, सट्टा-विश्लेषण और अपरंपरागत क्षेत्र — साहसिक महत्वाकांक्षा के प्रतिफल।

उपाय

राहु बीज मंत्र जपें, दुर्गा व गणेश की उपासना करें, शनिवार को उड़द, कंबल व सरसों-तेल का दान करें, शॉर्टकट-व्यसन-छल से दूर रहें और मन की स्पष्टता बनाए रखें।

वैदिक ज्योतिष में राहु ग्रह किसका कारक है?

राहु — उत्तर चंद्र-नोड — अतृप्त कामना की छाया है: महत्वाकांक्षा, मोह (माया) और जुनून। ये विदेश, तकनीक, आकस्मिक उत्थान, अपरंपरागत-वर्जित क्षेत्र, जन-प्रसिद्धि और व्यसन के कारक हैं। छाया-ग्रह होने से जिसे छूते हैं, उसे कई गुना कर देते हैं।

राहु किन राशियों का स्वामी है और कहाँ उच्च-नीच होता है?

राहु — (co-rules कुंभ) का स्वामी है। यह वृषभ में उच्च और वृश्चिक में नीच होता है; मूलत्रिकोण मिथुन है।

राहु की महादशा कितने वर्ष की होती है?

विंशोत्तरी दशा के 120 वर्षों में राहु की महादशा 18 वर्ष की होती है।

राहु का रत्न और उपाय क्या है?

राहु का रत्न Hessonite (Gomed) है। राहु बीज मंत्र जपें, दुर्गा व गणेश की उपासना करें, शनिवार को उड़द, कंबल व सरसों-तेल का दान करें, शॉर्टकट-व्यसन-छल से दूर रहें और मन की स्पष्टता बनाए रखें।