वैदिक ज्योतिष में चंद्र (Chandra)

चंद्र मनस् हैं — मन और भावनाएँ। ये भाव, अंतर्ज्ञान, माता, सुख-शांति, गृह, जन-समुदाय, जल और शरीर-पोषण के कारक हैं। वैदिक ज्योतिष में चंद्र-राशि और नक्षत्र केंद्रीय हैं — यह सबसे तीव्र और सबसे व्यक्तिगत ग्रह है।

कारकत्व (फल)

चंद्र मनस् हैं — मन और भावनाएँ। ये भाव, अंतर्ज्ञान, माता, सुख-शांति, गृह, जन-समुदाय, जल और शरीर-पोषण के कारक हैं। वैदिक ज्योतिष में चंद्र-राशि और नक्षत्र केंद्रीय हैं — यह सबसे तीव्र और सबसे व्यक्तिगत ग्रह है।

जब बलवान हो

बलवान चंद्र (वृषभ में उच्च, पूर्ण-प्रकाशित, शुभ-दृष्ट) भावनात्मक स्थिरता, शांत ग्रहणशील मन, लोकप्रियता, पालक स्वभाव और माता का स्नेह देता है।

जब कमज़ोर या पीड़ित हो

निर्बल चंद्र (वृश्चिक में नीच, क्षीण, या पाप-मध्य केमद्रुम) चिंता, मनोदशा के झूले, भावनात्मक असुरक्षा, तथा माता, निद्रा या जल-तत्व संबंधी कष्ट दे सकता है।

करियर और क्षेत्र

परिचर्या व सेवा, आतिथ्य, जन-संपर्क के काम, खाद्य-डेयरी, मनोविज्ञान, यात्रा-नौवहन — हर जन-केंद्रित, पोषक व्यवसाय।

उपाय

सोमवार रात्रि चंद्र बीज मंत्र जपें, पीपल को जल दें, चावल-दूध-चाँदी का दान करें, श्वेत वस्त्र धारण करें और माता व वरिष्ठ स्त्रियों की सेवा करें।

वैदिक ज्योतिष में चंद्र ग्रह किसका कारक है?

चंद्र मनस् हैं — मन और भावनाएँ। ये भाव, अंतर्ज्ञान, माता, सुख-शांति, गृह, जन-समुदाय, जल और शरीर-पोषण के कारक हैं। वैदिक ज्योतिष में चंद्र-राशि और नक्षत्र केंद्रीय हैं — यह सबसे तीव्र और सबसे व्यक्तिगत ग्रह है।

चंद्र किन राशियों का स्वामी है और कहाँ उच्च-नीच होता है?

चंद्र कर्क का स्वामी है। यह वृषभ 3° में उच्च और वृश्चिक 3° में नीच होता है; मूलत्रिकोण वृषभ 4°–30° है।

चंद्र की महादशा कितने वर्ष की होती है?

विंशोत्तरी दशा के 120 वर्षों में चंद्र की महादशा 10 वर्ष की होती है।

चंद्र का रत्न और उपाय क्या है?

चंद्र का रत्न Pearl (Moti) है। सोमवार रात्रि चंद्र बीज मंत्र जपें, पीपल को जल दें, चावल-दूध-चाँदी का दान करें, श्वेत वस्त्र धारण करें और माता व वरिष्ठ स्त्रियों की सेवा करें।