वैदिक ज्योतिष में मंगल (Mangal)

मंगल सेनापति हैं — ऊर्जा, साहस और पराक्रम। ये बल, संकल्प, महत्वाकांक्षा, छोटे भाई-बहन, भूमि-संपत्ति, प्रतिस्पर्धा, रक्त व मांसपेशियों के कारक हैं — कर्म और रक्षा के कारक योद्धा।

कारकत्व (फल)

मंगल सेनापति हैं — ऊर्जा, साहस और पराक्रम। ये बल, संकल्प, महत्वाकांक्षा, छोटे भाई-बहन, भूमि-संपत्ति, प्रतिस्पर्धा, रक्त व मांसपेशियों के कारक हैं — कर्म और रक्षा के कारक योद्धा।

जब बलवान हो

बलवान मंगल (मकर में उच्च, स्वराशि मेष/वृश्चिक, 10th में) साहस, अनुशासन, दम-खम, कर्मठ नेतृत्व, तकनीकी कौशल और भूमि, खेल या सेना-क्षेत्र में सफलता देता है।

जब कमज़ोर या पीड़ित हो

निर्बल या अशुभ-स्थित मंगल क्रोध, उतावलापन, दुर्घटना, कलह और रक्त-मांसपेशी विकार दे सकता है; 7th/8th को पीड़ित करे तो मांगलिक दोष बनता है, जो विवाह के समय और सामंजस्य को प्रभावित करता है।

करियर और क्षेत्र

सेना-पुलिस व रक्षा, अभियांत्रिकी, शल्य-चिकित्सा, खेल, रियल एस्टेट व निर्माण — साहस, ऊर्जा और तकनीकी कौशल के क्षेत्र।

उपाय

मंगलवार को हनुमान चालीसा और मंगल बीज मंत्र जपें, मसूर दाल व गुड़ का दान करें, ऊर्जा को अनुशासित व्यायाम में लगाएँ और क्रोध पर सचेत नियंत्रण साधें।

वैदिक ज्योतिष में मंगल ग्रह किसका कारक है?

मंगल सेनापति हैं — ऊर्जा, साहस और पराक्रम। ये बल, संकल्प, महत्वाकांक्षा, छोटे भाई-बहन, भूमि-संपत्ति, प्रतिस्पर्धा, रक्त व मांसपेशियों के कारक हैं — कर्म और रक्षा के कारक योद्धा।

मंगल किन राशियों का स्वामी है और कहाँ उच्च-नीच होता है?

मंगल मेष, वृश्चिक का स्वामी है। यह मकर 28° में उच्च और कर्क 28° में नीच होता है; मूलत्रिकोण मेष 0°–12° है।

मंगल की महादशा कितने वर्ष की होती है?

विंशोत्तरी दशा के 120 वर्षों में मंगल की महादशा 7 वर्ष की होती है।

मंगल का रत्न और उपाय क्या है?

मंगल का रत्न Red Coral (Moonga) है। मंगलवार को हनुमान चालीसा और मंगल बीज मंत्र जपें, मसूर दाल व गुड़ का दान करें, ऊर्जा को अनुशासित व्यायाम में लगाएँ और क्रोध पर सचेत नियंत्रण साधें।