वैदिक ज्योतिष में केतु (Ketu (South Node))

केतु — दक्षिण चंद्र-नोड — वैराग्य और मोक्ष की छाया है: बिना शीश का ग्रह। ये अध्यात्म, मुक्ति, पूर्व-जन्म कर्म, अंतर्ज्ञान, गूढ़-विद्या और उन आकस्मिक हानियों के कारक हैं जो आत्मा को भीतर मोड़ देती हैं। जहाँ राहु चाहता है, वहाँ केतु त्यागता है।

कारकत्व (फल)

केतु — दक्षिण चंद्र-नोड — वैराग्य और मोक्ष की छाया है: बिना शीश का ग्रह। ये अध्यात्म, मुक्ति, पूर्व-जन्म कर्म, अंतर्ज्ञान, गूढ़-विद्या और उन आकस्मिक हानियों के कारक हैं जो आत्मा को भीतर मोड़ देती हैं। जहाँ राहु चाहता है, वहाँ केतु त्यागता है।

जब बलवान हो

अनुकूल केतु आध्यात्मिक गहराई, तीक्ष्ण अंतर्ज्ञान, गूढ़-विद्या व उपचार-क्षमता, व्यर्थ से विरक्ति और मोक्ष-पथ पर प्रगति देता है — त्याग से सिद्धि।

जब कमज़ोर या पीड़ित हो

पीड़ित केतु भ्रम, आकस्मिक हानि, रिक्तता या अलगाव का भाव, रहस्यमय व्याधियाँ और जड़ से उखड़ने की अनुभूति दे सकता है; राहु के साथ काल सर्प योग बनाता है।

करियर और क्षेत्र

अध्यात्म व उपचार, शोध-अन्वेषण, चिकित्सा-औषधि, तकनीक, ज्योतिष व गूढ़-विद्या — गहराई, अंतर्ज्ञान और मुक्ति के क्षेत्र।

उपाय

केतु बीज मंत्र जपें, गणेश व इष्टदेव की उपासना करें, श्वानों को भोजन कराएँ, बहुरंगी कंबल व तिल का दान करें और ध्यान-वैराग्य-साधना को जीवन में उतारें।

वैदिक ज्योतिष में केतु ग्रह किसका कारक है?

केतु — दक्षिण चंद्र-नोड — वैराग्य और मोक्ष की छाया है: बिना शीश का ग्रह। ये अध्यात्म, मुक्ति, पूर्व-जन्म कर्म, अंतर्ज्ञान, गूढ़-विद्या और उन आकस्मिक हानियों के कारक हैं जो आत्मा को भीतर मोड़ देती हैं। जहाँ राहु चाहता है, वहाँ केतु त्यागता है।

केतु किन राशियों का स्वामी है और कहाँ उच्च-नीच होता है?

केतु — (co-rules वृश्चिक) का स्वामी है। यह वृश्चिक में उच्च और वृषभ में नीच होता है; मूलत्रिकोण धनु है।

केतु की महादशा कितने वर्ष की होती है?

विंशोत्तरी दशा के 120 वर्षों में केतु की महादशा 7 वर्ष की होती है।

केतु का रत्न और उपाय क्या है?

केतु का रत्न Cat's Eye (Lehsunia) है। केतु बीज मंत्र जपें, गणेश व इष्टदेव की उपासना करें, श्वानों को भोजन कराएँ, बहुरंगी कंबल व तिल का दान करें और ध्यान-वैराग्य-साधना को जीवन में उतारें।