वैदिक ज्योतिष में गुरु / बृहस्पति (Guru / Brihaspati)

गुरु (बृहस्पति) महान शुभ ग्रह और देव-गुरु हैं — विवेक, ज्ञान और कृपा। ये धर्म, उच्च-विद्या, संतान, भाग्य, धन, अध्यात्म, गुरु और (स्त्री-कुंडली में) पति के कारक हैं। इनकी दृष्टि कुंडली का सबसे रक्षक प्रभाव मानी जाती है।

कारकत्व (फल)

गुरु (बृहस्पति) महान शुभ ग्रह और देव-गुरु हैं — विवेक, ज्ञान और कृपा। ये धर्म, उच्च-विद्या, संतान, भाग्य, धन, अध्यात्म, गुरु और (स्त्री-कुंडली में) पति के कारक हैं। इनकी दृष्टि कुंडली का सबसे रक्षक प्रभाव मानी जाती है।

जब बलवान हो

बलवान गुरु (कर्क में उच्च, स्वराशि धनु/मीन, केंद्र-त्रिकोण में) विवेक, आशावाद, धन-वैभव, उत्तम संतान, श्रद्धा, सम्मान, सुदृढ़ निर्णय-शक्ति और प्रबल भाग्य देता है।

जब कमज़ोर या पीड़ित हो

निर्बल गुरु (मकर में नीच, पीड़ित) निर्णय-दोष, श्रद्धा या दिशा की कमी, धन-संतान में बाधा, यकृत विकार और अति-भोग दे सकता है।

करियर और क्षेत्र

शिक्षण व अकादमिक क्षेत्र, विधि-न्याय, वित्त-बैंकिंग, परामर्श, धर्म-दर्शन, चिकित्सा — ज्ञान और मार्गदर्शन का हर व्यवसाय।

उपाय

गुरुवार को गुरु बीज मंत्र जपें, हल्दी-चने की दाल-पीत वस्त्र का दान करें, गुरुजनों व पुरोहितों की सेवा करें, शास्त्र पढ़ें और विद्या-दान में उदार रहें।

वैदिक ज्योतिष में गुरु / बृहस्पति ग्रह किसका कारक है?

गुरु (बृहस्पति) महान शुभ ग्रह और देव-गुरु हैं — विवेक, ज्ञान और कृपा। ये धर्म, उच्च-विद्या, संतान, भाग्य, धन, अध्यात्म, गुरु और (स्त्री-कुंडली में) पति के कारक हैं। इनकी दृष्टि कुंडली का सबसे रक्षक प्रभाव मानी जाती है।

गुरु / बृहस्पति किन राशियों का स्वामी है और कहाँ उच्च-नीच होता है?

गुरु / बृहस्पति धनु, मीन का स्वामी है। यह कर्क 5° में उच्च और मकर 5° में नीच होता है; मूलत्रिकोण धनु 0°–10° है।

गुरु / बृहस्पति की महादशा कितने वर्ष की होती है?

विंशोत्तरी दशा के 120 वर्षों में गुरु / बृहस्पति की महादशा 16 वर्ष की होती है।

गुरु / बृहस्पति का रत्न और उपाय क्या है?

गुरु / बृहस्पति का रत्न Yellow Sapphire (Pukhraj) है। गुरुवार को गुरु बीज मंत्र जपें, हल्दी-चने की दाल-पीत वस्त्र का दान करें, गुरुजनों व पुरोहितों की सेवा करें, शास्त्र पढ़ें और विद्या-दान में उदार रहें।