उत्तरा फाल्गुनी मैत्री, आश्रय और कुलीन प्रतिबद्धता का नक्षत्र है — स्वामी सूर्य, देवता अर्यमा (अनुबंध और सहृदयता के देव)। पूर्वा के आनंद को यह कर्तव्य और उदारता से संतुलित करता है: जातक स्नेही, सहायक, सम्माननीय और भरोसेमंद होते हैं — साझेदारी और सहारा देने में श्रेष्ठ।
उत्तरा फाल्गुनी मैत्री, आश्रय और कुलीन प्रतिबद्धता का नक्षत्र है — स्वामी सूर्य, देवता अर्यमा (अनुबंध और सहृदयता के देव)। पूर्वा के आनंद को यह कर्तव्य और उदारता से संतुलित करता है: जातक स्नेही, सहायक, सम्माननीय और भरोसेमंद होते हैं — साझेदारी और सहारा देने में श्रेष्ठ।
समाज-कल्याण व परोपकार, साझेदारी-अनुबंध, संगठन-प्रशासन, परामर्श और उपचार — विश्वास और सेवा पर टिकी भूमिकाएँ।
समर्पित और भरोसेमंद — श्रेष्ठ जीवनसाथियों में गिने जाते हैं; निष्ठा, प्रतिबद्धता और परस्पर सहयोग इनके मूल्य हैं। विवाह और स्थिर मिलन इन्हें गहरा रास आता है।
उदारता और परोपकार; विश्वसनीयता और सम्मान; साझेदारी व संगठन-कौशल।
अति-दान से थकान; मान्यता की चाह; हठी स्वाभिमान।
अर्यमा और सूर्य की उपासना; प्रतिफल की इच्छा के बिना सहायता करें, सूर्य-साधना से तेज बढ़ता है।
विंशोत्तरी दशा प्रणाली में उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र का स्वामी सूर्य है।
उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र सिंह 26°40′ – कन्या 10° में विस्तृत है। इसका गण मनुष्य, नाड़ी वात और योनि गौ है।
उत्तरा फाल्गुनी के चार पादों के नामाक्षर हैं: Te, To, Pa, Pi।
अर्यमा और सूर्य की उपासना; प्रतिफल की इच्छा के बिना सहायता करें, सूर्य-साधना से तेज बढ़ता है।