स्वाति 'स्वतंत्र' है — पवन: स्वामी राहु, देवता वायु। प्रतीक हवा में झूलता नव-अंकुर: लचीला, आत्मनिर्भर, सतत गतिशील। जातक स्वतंत्रता, न्याय और खुली हवा को सबसे ऊपर रखते हैं — हर परिस्थिति में ढल जाते हैं, पर भीतर चुपचाप अपनी राह और संतुलन साधते चलते हैं।
स्वाति 'स्वतंत्र' है — पवन: स्वामी राहु, देवता वायु। प्रतीक हवा में झूलता नव-अंकुर: लचीला, आत्मनिर्भर, सतत गतिशील। जातक स्वतंत्रता, न्याय और खुली हवा को सबसे ऊपर रखते हैं — हर परिस्थिति में ढल जाते हैं, पर भीतर चुपचाप अपनी राह और संतुलन साधते चलते हैं।
व्यापार, कूटनीति व विधि, यात्रा-विमानन, शेयर-बाज़ार, संगीत और स्व-निर्मित उद्यम — जहाँ अनुकूलनशीलता जिताती है।
स्वतंत्रता-प्रिय और संतुलित — प्रेम में स्थान और समानता चाहिए, बंधन से कतराते हैं। जो साथी इनकी स्वतंत्रता का आदर करे, उसके लिए न्यायप्रिय, समर्पित और मधुर।
स्वतंत्रता और अनुकूलनशीलता; न्याय व संतुलन का बोध; कूटनीति और आत्मनिर्भरता।
बेचैनी और विरक्ति; दुविधा — हर पक्ष तौलते रहना; अलगाव-भाव।
वायु देव और हनुमान जी की उपासना; भटकाव के बीच स्थिर प्रतिबद्धताएँ राहु को शांत करती हैं।
विंशोत्तरी दशा प्रणाली में स्वाति नक्षत्र का स्वामी राहु है।
स्वाति नक्षत्र तुला 6°40′–20° में विस्तृत है। इसका गण देव, नाड़ी कफ और योनि महिष है।
स्वाति के चार पादों के नामाक्षर हैं: Ru, Re, Ro, Ta।
वायु देव और हनुमान जी की उपासना; भटकाव के बीच स्थिर प्रतिबद्धताएँ राहु को शांत करती हैं।