श्रवण 'सुनने वाला' है — स्वामी चंद्र, देवता विष्णु (जिनके तीन पग ब्रह्मांड नापते हैं)। प्रतीक कान: श्रवण से विद्या। जातक चौकस, विवेकी और परंपरा-प्रिय होते हैं — सुनकर सीखते हैं, सब स्मरण रखते हैं, और ज्ञान व परामर्श के विश्वस्त संरक्षक बनते हैं।
श्रवण 'सुनने वाला' है — स्वामी चंद्र, देवता विष्णु (जिनके तीन पग ब्रह्मांड नापते हैं)। प्रतीक कान: श्रवण से विद्या। जातक चौकस, विवेकी और परंपरा-प्रिय होते हैं — सुनकर सीखते हैं, सब स्मरण रखते हैं, और ज्ञान व परामर्श के विश्वस्त संरक्षक बनते हैं।
शिक्षण व शास्त्र-अध्ययन, भाषाएँ व संचार, मीडिया-प्रसारण, परामर्श, विधि, संगीत — श्रवण और अधिगम पर टिके क्षेत्र।
समर्पित और श्रवणशील — प्रेम में मर्यादा, प्रतिष्ठा और सामंजस्य को महत्व देते हैं। निष्ठावान व स्नेही हैं, पर लोक-चर्चा से आहत हो सकते हैं; खुला संवाद रिश्ते का रक्षक है।
गहन श्रवण और अधिगम; विवेक और श्रेष्ठ परामर्श; व्यापक सामाजिक संपर्क।
लोक-निंदा के प्रति अति-संवेदनशीलता; चिंता और अति-चिंतन; प्रतिष्ठा-मोह।
विष्णु-उपासना (विष्णु सहस्रनाम) और चंद्र को बल; पवित्र श्रवण (सत्संग) बढ़ाएँ, चर्चा-निंदा घटाएँ।
विंशोत्तरी दशा प्रणाली में श्रवण नक्षत्र का स्वामी चंद्र है।
श्रवण नक्षत्र मकर 10°–23°20′ में विस्तृत है। इसका गण देव, नाड़ी कफ और योनि वानर है।
श्रवण के चार पादों के नामाक्षर हैं: Ju, Je, Jo, Gha।
विष्णु-उपासना (विष्णु सहस्रनाम) और चंद्र को बल; पवित्र श्रवण (सत्संग) बढ़ाएँ, चर्चा-निंदा घटाएँ।