शतभिषा नक्षत्र (Shatabhisha)

शतभिषा 'सौ भिषज (वैद्य)' है — स्वामी राहु, देवता वरुण (जल और ऋत के देव)। प्रतीक रिक्त वृत्त: उपचार, रहस्य और एकांत का नक्षत्र। जातक स्वतंत्र, मौलिक और अपरंपरागत होते हैं — उपचार, शोध और गूढ़ सत्य इन्हें खींचते हैं; वृत्त के बाहर सोचते हैं और प्रायः एकांत में सर्वश्रेष्ठ काम करते हैं।

Read this page in English

व्यक्तित्व और स्वभाव

शतभिषा 'सौ भिषज (वैद्य)' है — स्वामी राहु, देवता वरुण (जल और ऋत के देव)। प्रतीक रिक्त वृत्त: उपचार, रहस्य और एकांत का नक्षत्र। जातक स्वतंत्र, मौलिक और अपरंपरागत होते हैं — उपचार, शोध और गूढ़ सत्य इन्हें खींचते हैं; वृत्त के बाहर सोचते हैं और प्रायः एकांत में सर्वश्रेष्ठ काम करते हैं।

करियर और व्यवसाय

चिकित्सा व उपचार, विज्ञान-शोध, ज्योतिष व गूढ़-विद्या, तकनीक, विमानन-अंतरिक्ष और सुधारवादी-अपरंपरागत कार्य।

प्रेम, विवाह और अनुकूलता

निजता और स्वतंत्रता चाहिए — प्रेम में विरक्त-से दिख सकते हैं। जो साथी धैर्य रखे और इनके रहस्य का आदर करे, उसके साथ गहरा, अनूठा और आश्चर्यजनक रूप से निष्ठावान बंधन बनता है।

शक्तियाँ

उपचार और शोध-क्षमता; स्वतंत्र, मौलिक चिंतन; गूढ़ अंतर्दृष्टि।

चुनौतियाँ

गोपनीयता और अलगाव; हठी विरक्ति; एकाकीपन।

उपाय

वरुण देव की उपासना और राहु की शांति; एकांत और संपर्क का संतुलन रखें, उपचार-शक्ति को सेवा में लगाएँ।

शतभिषा नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन है?

विंशोत्तरी दशा प्रणाली में शतभिषा नक्षत्र का स्वामी राहु है।

शतभिषा नक्षत्र किस राशि में आता है?

शतभिषा नक्षत्र कुंभ 6°40′–20° में विस्तृत है। इसका गण राक्षस, नाड़ी वात और योनि अश्व है।

शतभिषा नक्षत्र के नाम अक्षर (पाद अक्षर) कौन-से हैं?

शतभिषा के चार पादों के नामाक्षर हैं: Go, Sa, Si, Su।

शतभिषा नक्षत्र के उपाय क्या हैं?

वरुण देव की उपासना और राहु की शांति; एकांत और संपर्क का संतुलन रखें, उपचार-शक्ति को सेवा में लगाएँ।