रोहिणी चंद्रमा की प्रिय है — स्वामी चंद्र, देवता ब्रह्मा/प्रजापति, प्रतीक शकट (बैलगाड़ी)। सबसे उर्वर और मोहक नक्षत्र: जातक चुंबकीय, सुंदर, कलात्मक और रस-प्रिय होते हैं, जिनके हाथ में चीज़ें बढ़ती हैं — फसल हो, धन हो या संबंध। भौतिक सुख और सौंदर्य-बोध इन्हें सहज मिलता है।
रोहिणी चंद्रमा की प्रिय है — स्वामी चंद्र, देवता ब्रह्मा/प्रजापति, प्रतीक शकट (बैलगाड़ी)। सबसे उर्वर और मोहक नक्षत्र: जातक चुंबकीय, सुंदर, कलात्मक और रस-प्रिय होते हैं, जिनके हाथ में चीज़ें बढ़ती हैं — फसल हो, धन हो या संबंध। भौतिक सुख और सौंदर्य-बोध इन्हें सहज मिलता है।
कृषि व खाद्य, फैशन, कला-डिज़ाइन, विलासिता की वस्तुएँ, बैंकिंग व रियल एस्टेट, संगीत और मंच-कला — जहाँ सौंदर्य, वृद्धि और मूल्य मिलते हैं।
गहरे रोमांटिक और समर्पित — सबसे वांछनीय साथियों में गिने जाते हैं, पर ईर्ष्या और अधिकार-भाव आ सकता है। प्रेम में सौंदर्य, सुख-सुविधा और अटूट निष्ठा चाहिए।
चुंबकीय आकर्षण और सृजनशीलता; समृद्धि व अभिवृद्धि का वरदान; अडिग समर्पण।
अधिकार-भाव और ईर्ष्या; भोग-विलास की ओर झुकाव; हठ।
ब्रह्मा और चंद्रमा की उपासना; श्वेत वस्तुओं का दान और खुले हाथ की उदारता अधिकार-भाव को गलाती है।
विंशोत्तरी दशा प्रणाली में रोहिणी नक्षत्र का स्वामी चंद्र है।
रोहिणी नक्षत्र वृषभ 10°–23°20′ में विस्तृत है। इसका गण मनुष्य, नाड़ी कफ और योनि सर्प है।
रोहिणी के चार पादों के नामाक्षर हैं: O, Va/Ba, Vi/Bi, Vu/Bu।
ब्रह्मा और चंद्रमा की उपासना; श्वेत वस्तुओं का दान और खुले हाथ की उदारता अधिकार-भाव को गलाती है।