मृगशिरा 'मृग-मस्तक' है — स्वामी मंगल, देवता सोम। यह राशिचक्र का खोजी है: जिज्ञासु, कोमल और निरंतर श्रेष्ठ की तलाश में — ज्ञान, अनुभव और आदर्श को सूँघता हुआ। मृग की तरह चंचल और शीघ्र चौंकने वाले, पर सुरुचिपूर्ण, जिज्ञासु और सूक्ष्मदर्शी।
मृगशिरा 'मृग-मस्तक' है — स्वामी मंगल, देवता सोम। यह राशिचक्र का खोजी है: जिज्ञासु, कोमल और निरंतर श्रेष्ठ की तलाश में — ज्ञान, अनुभव और आदर्श को सूँघता हुआ। मृग की तरह चंचल और शीघ्र चौंकने वाले, पर सुरुचिपूर्ण, जिज्ञासु और सूक्ष्मदर्शी।
शोध, लेखन-पत्रकारिता, यात्रा-अन्वेषण, बिक्री, रियल एस्टेट और संगीत — हर वह खोज-यात्रा जिसे जिज्ञासा चलाती है।
प्रेम में भी शाश्वत खोजी — साथी को आदर्श मानते और चिनगारी का पीछा करते हैं। इन्हें मानसिक संगत और कोमलता चाहिए; बेचैनी पर अंकुश न हो तो रिश्ता डगमगा सकता है।
अतृप्त जिज्ञासा और बुद्धि; कोमल, मोहक स्वभाव; अनुकूलनशीलता और सूक्ष्म दृष्टि।
बेचैनी और अनिर्णय; शंकालु वृत्ति; कभी तृप्त न होना।
सोम (चंद्र) और शिव की उपासना; स्थिर दिनचर्या और संतोष-साधना से मंगल ठहरता है।
विंशोत्तरी दशा प्रणाली में मृगशिरा नक्षत्र का स्वामी मंगल है।
मृगशिरा नक्षत्र वृषभ 23°20′ – मिथुन 6°40′ में विस्तृत है। इसका गण देव, नाड़ी पित्त और योनि सर्प है।
मृगशिरा के चार पादों के नामाक्षर हैं: Ve/Be, Vo/Bo, Ka, Ki।
सोम (चंद्र) और शिव की उपासना; स्थिर दिनचर्या और संतोष-साधना से मंगल ठहरता है।