मघा 'महती' है — राजसिंहासन: स्वामी केतु, देवता पितृगण। जातक में जन्मजात राजसी गरिमा, वंश और परंपरा से गहरा नाता होता है — आदर पाते हैं और जड़ों से जुड़े रहते हैं। मान-मर्यादा, समारोह और विरासत — जो मिली और जो छोड़नी है — इनके केंद्र में रहती है।
मघा 'महती' है — राजसिंहासन: स्वामी केतु, देवता पितृगण। जातक में जन्मजात राजसी गरिमा, वंश और परंपरा से गहरा नाता होता है — आदर पाते हैं और जड़ों से जुड़े रहते हैं। मान-मर्यादा, समारोह और विरासत — जो मिली और जो छोड़नी है — इनके केंद्र में रहती है।
नेतृत्व व प्रशासन, राजनीति, विधि, इतिहास-धरोहर, कर्मकांड — अधिकार, प्रतिष्ठा और पितृ-दायित्व की भूमिकाएँ।
गौरव और निष्ठा से प्रेम करते हैं — बदले में आदर और प्रशंसा चाहते हैं। परिवार की स्वीकृति और परंपरा मायने रखती है; प्रतिबद्धता को गंभीरता से निभाने वाले उदार साथी।
सहज नेतृत्व और गरिमा; परंपरा व पूर्वजों का सम्मान; उदारता और निष्ठा।
अहं और पद-प्रतिष्ठा की चाह; दंभ या अधिकार-भावना; अतीत में जीना।
पितरों का तर्पण-श्राद्ध करें और केतु को स्थिर रखें; बड़ों की सेवा और विनम्रता मघा के अभिमान को गला देती है।
विंशोत्तरी दशा प्रणाली में मघा नक्षत्र का स्वामी केतु है।
मघा नक्षत्र सिंह 0°–13°20′ में विस्तृत है। इसका गण राक्षस, नाड़ी कफ और योनि मूषक है।
मघा के चार पादों के नामाक्षर हैं: Ma, Mi, Mu, Me।
पितरों का तर्पण-श्राद्ध करें और केतु को स्थिर रखें; बड़ों की सेवा और विनम्रता मघा के अभिमान को गला देती है।