कृत्तिका (कृत्तिका-मंडल/Pleiades) का स्वामी सूर्य और देवता अग्नि हैं — प्रतीक क्षुरा और ज्वाला। जातक भ्रम काट देते हैं — स्पष्टवादी, शुद्ध करने वाले और रक्षक। अग्नि-तत्व की तीव्र भूख और पूर्णता की पारखी दृष्टि इन्हें अपने और दूसरों के दोष जलाकर निखारने वाली बनाती है।
कृत्तिका (कृत्तिका-मंडल/Pleiades) का स्वामी सूर्य और देवता अग्नि हैं — प्रतीक क्षुरा और ज्वाला। जातक भ्रम काट देते हैं — स्पष्टवादी, शुद्ध करने वाले और रक्षक। अग्नि-तत्व की तीव्र भूख और पूर्णता की पारखी दृष्टि इन्हें अपने और दूसरों के दोष जलाकर निखारने वाली बनाती है।
संपादन-समालोचना, शल्य-चिकित्सा, सेना और रक्षा, पाक-कला, धातु व अभियांत्रिकी — जहाँ सटीकता, साहस और अनावश्यक को काटने का संकल्प चाहिए।
खरी बात कहते हैं और वही अपेक्षा रखते हैं। रक्षक और समर्पित साथी — बस तीखी वाणी को मृदु करना सीखना होता है; विश्वास बनने पर भीतर की गर्मजोशी खुलती है।
तीक्ष्ण बुद्धि और विवेक; सामना करने और रक्षा करने का साहस; शुद्धता व उत्कृष्टता की लगन।
कटु आलोचक वाणी; अपूर्णता से अधीरता; शीघ्र क्रोध।
अग्नि और सूर्य की उपासना (सूर्य नमस्कार, आदित्य हृदय स्तोत्र); भीतर की अग्नि को आलोचना में नहीं, अनुशासन में लगाएँ।
विंशोत्तरी दशा प्रणाली में कृत्तिका नक्षत्र का स्वामी सूर्य है।
कृत्तिका नक्षत्र मेष 26°40′ – वृषभ 10° में विस्तृत है। इसका गण राक्षस, नाड़ी कफ और योनि भेड़ है।
कृत्तिका के चार पादों के नामाक्षर हैं: A, Ee, U, Ea।
अग्नि और सूर्य की उपासना (सूर्य नमस्कार, आदित्य हृदय स्तोत्र); भीतर की अग्नि को आलोचना में नहीं, अनुशासन में लगाएँ।