ज्येष्ठा नक्षत्र (Jyeshtha)

ज्येष्ठा 'ज्येष्ठ (सबसे बड़ी)' है — स्वामी बुध, देवता इंद्र (देवराज)। वरिष्ठता, दायित्व और गुप्त शक्ति इसका स्वभाव है: जातक सक्षम, रक्षक और प्रभावी होते हैं, प्रायः कम आयु से ही ज़िम्मेदारी उठाते हैं। अपनों की प्रचंड रक्षा करते हैं, पर बल के पीछे भीतर एक निजी बोझ या एकाकीपन रह सकता है।

व्यक्तित्व और स्वभाव

ज्येष्ठा 'ज्येष्ठ (सबसे बड़ी)' है — स्वामी बुध, देवता इंद्र (देवराज)। वरिष्ठता, दायित्व और गुप्त शक्ति इसका स्वभाव है: जातक सक्षम, रक्षक और प्रभावी होते हैं, प्रायः कम आयु से ही ज़िम्मेदारी उठाते हैं। अपनों की प्रचंड रक्षा करते हैं, पर बल के पीछे भीतर एक निजी बोझ या एकाकीपन रह सकता है।

करियर और व्यवसाय

प्रबंधन व प्रशासन, सेना-पुलिस, गूढ़-विद्या व शोध, अभियांत्रिकी और वरिष्ठ-रक्षक भूमिकाएँ — जहाँ दायित्व और गुप्त बल चाहिए।

प्रेम, विवाह और अनुकूलता

रक्षा-भाव से गहरा पर संयत प्रेम — आदर और विश्वसनीयता इन्हें चाहिए। नियंत्रण या गोपनीयता की वृत्ति आ सकती है; इनकी मर्यादा को समझने वाला साथी ही भीतर की ऊष्मा खोल पाता है।

शक्तियाँ

दायित्व-बोध और क्षमता; रक्षक शक्ति; संकट में साधन-कुशलता।

चुनौतियाँ

गोपनीयता और अलगाव; नियंत्रण की आवश्यकता; अभिमान या बोझ-बोध।

उपाय

इंद्र की उपासना और बुध को बल; वरिष्ठता का भार विनम्रता से उतारें — सहायता माँगना भी सीखें।

ज्येष्ठा नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन है?

विंशोत्तरी दशा प्रणाली में ज्येष्ठा नक्षत्र का स्वामी बुध है।

ज्येष्ठा नक्षत्र किस राशि में आता है?

ज्येष्ठा नक्षत्र वृश्चिक 16°40′–30° में विस्तृत है। इसका गण राक्षस, नाड़ी वात और योनि शश है।

ज्येष्ठा नक्षत्र के नाम अक्षर (पाद अक्षर) कौन-से हैं?

ज्येष्ठा के चार पादों के नामाक्षर हैं: No, Ya, Yi, Yu।

ज्येष्ठा नक्षत्र के उपाय क्या हैं?

इंद्र की उपासना और बुध को बल; वरिष्ठता का भार विनम्रता से उतारें — सहायता माँगना भी सीखें।