धनिष्ठा 'सबसे धनवान' और सबसे संगीतमय है — स्वामी मंगल, देवता अष्ट वसु (समृद्धि के देव)। प्रतीक डमरू — लय और समृद्धि। जातक ऊर्जावान, लय-सिद्ध, महत्वाकांक्षी और उदार होते हैं; संगीत, समय-बोध और भौतिक सफलता का वरदान — लोगों को जोड़कर उद्यम और मंच दोनों पर फलते हैं।
धनिष्ठा 'सबसे धनवान' और सबसे संगीतमय है — स्वामी मंगल, देवता अष्ट वसु (समृद्धि के देव)। प्रतीक डमरू — लय और समृद्धि। जातक ऊर्जावान, लय-सिद्ध, महत्वाकांक्षी और उदार होते हैं; संगीत, समय-बोध और भौतिक सफलता का वरदान — लोगों को जोड़कर उद्यम और मंच दोनों पर फलते हैं।
संगीत व मंच-कला, रियल एस्टेट व धन-प्रबंधन, अभियांत्रिकी, खेल और सामूहिक उद्यम — समृद्धि, लय और टीम के क्षेत्र।
उमंग और उदारता से भरा प्रेम — पर महत्वाकांक्षा कभी दूरी न लगने दें। इन्हें अपनी धुन साझा करने वाला साथी चाहिए; जम जाने पर दानी और रक्षक।
समृद्धि और उदारता; संगीत व लय-प्रतिभा; ऊर्जा और महत्वाकांक्षा।
भौतिकता और अहं; आक्रामकता या बेचैनी; भावनात्मक दूरी।
अष्ट वसुओं की उपासना और मंगल को बल; समृद्धि खुले हाथ बाँटें, ऊर्जा को संगीत व लय में साधें।
विंशोत्तरी दशा प्रणाली में धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी मंगल है।
धनिष्ठा नक्षत्र मकर 23°20′ – कुंभ 6°40′ में विस्तृत है। इसका गण राक्षस, नाड़ी पित्त और योनि सिंह है।
धनिष्ठा के चार पादों के नामाक्षर हैं: Ga, Gi, Gu, Ge।
अष्ट वसुओं की उपासना और मंगल को बल; समृद्धि खुले हाथ बाँटें, ऊर्जा को संगीत व लय में साधें।