भरणी 'धारण करने वाली' है — देवता यम, प्रतीक योनि: संयम के भीतर सृजन और परिवर्तन। स्वामी शुक्र, राशि मेष — जातक तीव्र, रस-प्रिय और अनुशासित होते हैं, जिनमें सृजन और धारण की प्रबल शक्ति रहती है। सीमाओं, सहनशीलता और कर्म-परिणाम का बोध इन्हें औरों से गहरा मिलता है।
भरणी 'धारण करने वाली' है — देवता यम, प्रतीक योनि: संयम के भीतर सृजन और परिवर्तन। स्वामी शुक्र, राशि मेष — जातक तीव्र, रस-प्रिय और अनुशासित होते हैं, जिनमें सृजन और धारण की प्रबल शक्ति रहती है। सीमाओं, सहनशीलता और कर्म-परिणाम का बोध इन्हें औरों से गहरा मिलता है।
कला, फ़िल्म-मनोरंजन, प्रसूति व स्त्री-रोग चिकित्सा, विधि-न्याय, और हर वह क्षेत्र जहाँ दबाव में अनुशासन चाहिए।
प्रतिबद्ध होने पर गहरा, कुछ अधिकार-भाव लिए प्रेम। गज योनि प्रबल आकर्षण देती है; इन्हें ऐसा साथी चाहिए जो इनकी तीव्रता और कर्तव्य-भावना दोनों का सम्मान करे।
सहनशक्ति और दृढ़ संकल्प; प्रबल सृजन-शक्ति; स्पष्ट नैतिक बोध।
अति और असंयम; नियंत्रण या आलोचना की प्रवृत्ति; दूसरों का बोझ स्वयं उठा लेना।
यमराज और माँ लक्ष्मी की उपासना; संयम और निःस्वार्थ सृजन से शुक्र संतुलित रहता है।
विंशोत्तरी दशा प्रणाली में भरणी नक्षत्र का स्वामी शुक्र है।
भरणी नक्षत्र मेष 13°20′–26°40′ में विस्तृत है। इसका गण मनुष्य, नाड़ी पित्त और योनि गज है।
भरणी के चार पादों के नामाक्षर हैं: Lee, Lu, Le, Lo।
यमराज और माँ लक्ष्मी की उपासना; संयम और निःस्वार्थ सृजन से शुक्र संतुलित रहता है।