अश्विनी नक्षत्र (Ashwini)

अश्विनी पहला नक्षत्र है — प्रतीक अश्व-मुख, देवता अश्विनी कुमार (देव वैद्य)। जातक तेज़, अग्रणी और ऊर्जावान होते हैं — राशिचक्र के पथ-प्रदर्शक, नई शुरुआत के लिए सदा तत्पर और चिकित्सा-सेवा की सहज प्रवृत्ति वाले। स्वामी केतु और पूर्णतः मेष राशि में होने से ये तुरंत निर्णय लेते हैं, तेज़ चलते हैं और रोक-टोक पसंद नहीं करते।

व्यक्तित्व और स्वभाव

अश्विनी पहला नक्षत्र है — प्रतीक अश्व-मुख, देवता अश्विनी कुमार (देव वैद्य)। जातक तेज़, अग्रणी और ऊर्जावान होते हैं — राशिचक्र के पथ-प्रदर्शक, नई शुरुआत के लिए सदा तत्पर और चिकित्सा-सेवा की सहज प्रवृत्ति वाले। स्वामी केतु और पूर्णतः मेष राशि में होने से ये तुरंत निर्णय लेते हैं, तेज़ चलते हैं और रोक-टोक पसंद नहीं करते।

करियर और व्यवसाय

चिकित्सा और उपचार, आपातकालीन व बचाव सेवाएँ, खेल, परिवहन और स्टार्ट-अप — जहाँ गति, पहल और नई शुरुआत का मोल है।

प्रेम, विवाह और अनुकूलता

प्रेम में उत्साही और शीघ्र आकर्षित — इन्हें ऐसा साथी चाहिए जो इनकी ऊर्जा के साथ कदम मिला सके। देव गण और अश्व योनि इन्हें क्रीड़ाप्रिय पर बेचैन बनाती है; धैर्यवान, स्थिर साथी सर्वश्रेष्ठ रहता है।

शक्तियाँ

अग्रणी साहस और पहल; सहज चिकित्सा-सेवा वृत्ति; गति, स्वतंत्रता और यौवन-ऊर्जा।

चुनौतियाँ

अधीरता और आवेग; काम शुरू कर अधूरा छोड़ना; हठी स्वभाव।

उपाय

अश्विनी कुमारों और गणेश जी की उपासना करें; विनम्रता और हर काम पूरा करने की आदत से केतु शांत होता है।

अश्विनी नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन है?

विंशोत्तरी दशा प्रणाली में अश्विनी नक्षत्र का स्वामी केतु है।

अश्विनी नक्षत्र किस राशि में आता है?

अश्विनी नक्षत्र मेष 0°–13°20′ में विस्तृत है। इसका गण देव, नाड़ी वात और योनि अश्व है।

अश्विनी नक्षत्र के नाम अक्षर (पाद अक्षर) कौन-से हैं?

अश्विनी के चार पादों के नामाक्षर हैं: Chu, Che, Cho, La।

अश्विनी नक्षत्र के उपाय क्या हैं?

अश्विनी कुमारों और गणेश जी की उपासना करें; विनम्रता और हर काम पूरा करने की आदत से केतु शांत होता है।