अनुराधा 'भक्ति से सिद्धि का तारा' है — स्वामी शनि, देवता मित्र (मैत्री के देव)। कीचड़ में भी खिलता कमल इसका भाव है: जातक गहरी मित्रता गढ़ते हैं और निष्ठा, अनुशासन व भक्ति से सफलता पाते हैं। घर से दूर भी फलते-फूलते हैं और सीमाओं के पार लोगों को जोड़ते चलते हैं।
अनुराधा 'भक्ति से सिद्धि का तारा' है — स्वामी शनि, देवता मित्र (मैत्री के देव)। कीचड़ में भी खिलता कमल इसका भाव है: जातक गहरी मित्रता गढ़ते हैं और निष्ठा, अनुशासन व भक्ति से सफलता पाते हैं। घर से दूर भी फलते-फूलते हैं और सीमाओं के पार लोगों को जोड़ते चलते हैं।
संगठन व प्रबंधन, विदेश-संबंध और यात्रा, समूह-नेतृत्व, परामर्श, शोध और भक्ति-अध्यात्म — जहाँ सहयोग और अनुशासन से सिद्धि बनती है।
निष्ठावान और हृदय से स्नेही — श्रेष्ठतम समर्पित साथियों में; प्रेम के भीतर गहरी मित्रता को महत्व देते हैं। भाव-गहराई और अनुशासन साधकर कठिन समय में भी साथ निभाते हैं।
भक्ति और निष्ठा; मैत्री और सहयोग-कौशल; अनुशासन और सहनशीलता।
भावों के उतार-चढ़ाव; अपनी आवश्यकता कहने में संकोच; एकाकीपन या विषाद।
मित्र देव की उपासना और शनि की शांति; मित्रता और स्थिर भक्ति भीतर के अकेलेपन को भरती है।
विंशोत्तरी दशा प्रणाली में अनुराधा नक्षत्र का स्वामी शनि है।
अनुराधा नक्षत्र वृश्चिक 3°20′–16°40′ में विस्तृत है। इसका गण देव, नाड़ी कफ और योनि शश है।
अनुराधा के चार पादों के नामाक्षर हैं: Na, Ni, Nu, Ne।
मित्र देव की उपासना और शनि की शांति; मित्रता और स्थिर भक्ति भीतर के अकेलेपन को भरती है।