गंडमूल दोष

गंडमूल तब लागू होता है जब जन्म के समय चंद्रमा बुध या केतु द्वारा शासित छह नक्षत्रों में से किसी एक में हो — अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल या रेवती — जो राशिचक्र की जल–अग्नि संधियों (गंडांत) पर स्थित हैं।

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यह कैसे बनता है (सटीक स्थिति)

जन्म चंद्रमा अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल या रेवती में — लगभग हर नौ में से दो जन्म। तीव्रता चरण के अनुसार बदलती है; संधि-चरण सबसे महत्वपूर्ण हैं। कुंडली स्काई आपके गणना किए गए चंद्रमा से सटीक नक्षत्र और चरण दर्शाता है।

वास्तविक प्रभाव

परंपरा गंडमूल जन्म को आरंभिक जीवन की संवेदनशीलता (शिशु या माता-पिता के स्वास्थ्य) और एक अपरंपरागत, संधि पार करने वाले जीवन-पथ से जोड़ती है — ऐसे लोग जो एक अध्याय पूर्णतः समाप्त करके ही अगला आरंभ करते हैं। इन छह नक्षत्रों में से कई प्रसिद्ध रूप से तीक्ष्ण और परिवर्तनकारी व्यक्तित्व भी देते हैं।

ईमानदार सच

आपके परिचितों में लगभग 22% गंडमूल नक्षत्र में जन्मे हैं। शास्त्रीय उत्तर 27वें दिन एक बार की शांति है, जिसके बाद विषय समाप्त माना जाता है — जीवन भर का भय या बार-बार की सशुल्क पूजाएँ नहीं। यदि आरंभिक वर्ष सामान्य बीत गए, तो दोष की मुख्य अवधि उनके साथ ही बीत चुकी है।

उपाय

जन्म के 27वें दिन (जब वही नक्षत्र लौटता है) पारंपरिक मूल शांति पूजा, नक्षत्र के देवता की आराधना, और — देर से जानने वाले वयस्कों के लिए — नक्षत्र स्वामी के मंत्र का जप। शास्त्रीय रूप से इससे अधिक नाटकीय कुछ आवश्यक नहीं।

मेरी कुंडली में गंडमूल दोष है या नहीं, यह कैसे जानूँ?

कुंडली स्काई पर अपनी मुफ़्त कुंडली बनाइए — इंजन स्विस एफ़ेमेरिस (लाहिरी अयनांश) से आपकी कुंडली की गणना करता है और शास्त्रीय स्थिति स्वतः जाँचता है: जन्म चंद्रमा अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल या रेवती में — लगभग हर नौ में से दो जन्म। तीव्रता चरण के अनुसार बदलती है; संधि-चरण सबसे महत्वपूर्ण हैं। कुंडली स्काई आपके गणना किए गए चंद्रमा से सटीक नक्षत्र और चरण दर्शाता है।

क्या गंडमूल दोष सचमुच उतना गंभीर है जितना कहा जाता है?

आपके परिचितों में लगभग 22% गंडमूल नक्षत्र में जन्मे हैं। शास्त्रीय उत्तर 27वें दिन एक बार की शांति है, जिसके बाद विषय समाप्त माना जाता है — जीवन भर का भय या बार-बार की सशुल्क पूजाएँ नहीं। यदि आरंभिक वर्ष सामान्य बीत गए, तो दोष की मुख्य अवधि उनके साथ ही बीत चुकी है।

गंडमूल दोष के उपाय क्या हैं?

जन्म के 27वें दिन (जब वही नक्षत्र लौटता है) पारंपरिक मूल शांति पूजा, नक्षत्र के देवता की आराधना, और — देर से जानने वाले वयस्कों के लिए — नक्षत्र स्वामी के मंत्र का जप। शास्त्रीय रूप से इससे अधिक नाटकीय कुछ आवश्यक नहीं।

गंडमूल दोष किस कारण बनता है?

जन्म चंद्रमा अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल या रेवती में — लगभग हर नौ में से दो जन्म। तीव्रता चरण के अनुसार बदलती है; संधि-चरण सबसे महत्वपूर्ण हैं। कुंडली स्काई आपके गणना किए गए चंद्रमा से सटीक नक्षत्र और चरण दर्शाता है।